Bin Bulaye barati

अभी बस बमरौली स्टेशन ही आया है पर मन मैं ना जाने कितनी तेज हलचल से हो रही है. ट्रेन की खिड़की से तेजी से पास होता हुआ कैंट का स्कूल फिर एक प्लान का स्टैच्यू.

सारे यात्री लोग अपने बैग को पैकिंग कर रहे हैं कि बस अभी थोड़ी ही देर में मैं इलाहाबाद आने वाला है। मेरा मन एक दम अजीब से हालात में है समझ नहीं पा रहा हूं कि खुश हो जाऊं या दुखी

अक्सर यहां पर पहले ही पापा को फोन करने लगता था कि बस आने ही वाला हूं और आप कहां मिलेंगे।

अभी कुछ यादों के झरोखे में गया ही था कि अचानक ट्रेन इलाहाबाद जंक्शन पर रुक गई. सारे लोग अपना सामान जल्दी से बाहर निकालना चाह रहे हैं. कुछ कुली धीरे से रास्ता बना के अंदर आ रहे हैं . एक कुली ने पूछा कहा जायेंगे साहब चौक या सिविल लाइंस.मेरे पास कोई सामान नहीं था तो बस सीधी ट्रेन से बाहर ही आ गया था।

सालों बाद इलाहाबाद आया था पर अभी भी शहर बिल्कुल अपना सा ही लगता है. जैसा पूछता हो आपसे कि क्या भाई कितना टाइम लगा दिया आते आते कभी ये अपना होम टाउन था पर अब घर नहीं है और मेरे माता-पिता भी नहीं हैं. अभी भी एक रिश्ता है इस शहर से मेरी ससुराल है यहां पे महोल्ले मैं. नेहा और बच्चे इंडिया आने के बाद इलाहाबाद चले गए थे और मैं कुछ दिनों के लिए बेंगलुरु चला गया था मेरा सामान भी मेरे परिवार के साथ इलाहाबाद आ गया था .

एक रिक्शे से कल्याणी देवी जाने को बोला और बस वो यादों का सिलसिला चालू हो गया. रिक्शे वाला जिन गलियों से गुजरात जा रहा था वो सब कुछ ना कुछ यादों से जुड़े थे. चौक की गलियों में वो तौल की कॉपी की दुकान या फिर अतरसुइयां में वीडियो गेम की दुकान.हर गलियों में बस अपना बचपन घूम रहा था इस बार अच्छा ये था कि शाम को आया था तो शहर में कुछ अलग ही रौनक थी. शहर में भीड़ काफी बढ़ गयी थी और शायद ये शादियों का मौसम था. हर गली में एक बारात दिख रही थी वैसे भी काफी नए मैरिज हाल बन गए थे. मुझे आज भी याद है मेरे घर के पास ही चौधरी गार्डन मैरिज हॉल था. उस मैरिज हॉल से तो सदियों का नाता था हम सारे भाई बहन की शादिया यही से हुई थी. बचपन में जब रात को पढ़ते रहो तो अक्सर म्यूजिक की आवाज़ कानो पे अलग ही आनंद देती थी.

रिक्शे वाला चौधरी गार्डन के पास बिलकुल रुक ही गया था जाम की वजह से. मैंने उसको बोला यही छोड़े दे मैं चला जाऊंगा क्योंकि कोई सामान भी नहीं था और घर भी पास ही था.

अभी थोड़ी दूर चला ही था उस भीड़ में तो ऐसा लगा की बरात का ही हिस्सा बन गया था मैं. ऑफिस के काम से गया था तो सूट मैं ही था तो शायद बारात में आये लोगो जैसे ही लगने लगा था मैं. फिर अचानक चौधरी गार्डन के गेट के पास कुछ लोगो को मैं बरात का पार्ट लगा और उन्होंने एक माला सी पहना दी और मुझे गेट से अंदर बुलाने लगे. पहले तो मैं रुक गया और थोड़ा सा घबरा भी गया था. फिर अचानक न जाने क्या हुआ कि मन हुआ की चलो अंदर जा के देखते है. आयरलैंड में रहते हुए काफी टाइम हो गया और बहुत सालों से कोई शादी अटेंड नहीं की थी. बड़ी अजीब सी बात है की बाहर रहने की वजह से न जाने क्यों शादी अटेंड करने का बहुत मन्न सा हो गया. हमेशा लोगों की शादी की फोटो सोशल मीडिया पे देखे के न जाने कब से एक शादी में जाने का मन था

सिर्फ खाने की खुशबू ही नहीं पर एक शादी का वो माहौल न जाने क्यों मैं अपने आपको रोक नहीं पाया.सोचा चलो अन्दर चलके देख के वापस आ जाएंगे. इसी गार्डन में सालों पहले मेरी भी शादी हुई थी और बहुत सारी यादें थी यहाँ की जैसे की भाइयों और कौसिन्स, सिस्टर इन लॉ की शादी. अंदर का माहौल बहुत ही अच्छा था और हर तरफ खाने के नए स्टाल लगे हुए थे. जय माल का मंच बहुत ही बड़ियाँ सा था और कुछ फिल्मों से सजाया था ताकि अच्छी फोटो आ सके. कुछ बादलों सा धुँआ निकल रहा था मटको से जोकि बहुत ही अच्छा लग रहा था. पता नहीं क्यों वह पे ऐसा लग रहा था की की ये सारे लोग जाने पेहचाने से है. थोड़ी देर बाद ये तो पता चला की ये भी किसी कायस्थ के यहाँ की शादी है और शायद मेरे मोहल्ले के लोग है यहाँ पे. मुझे कुछ अपने आस पास के पडोसी भी दिखाई दे रहे थे और शायद वो भी मुझे पहचानने की कोशिश कर रहे थे.कुछ लोगो ने नमस्ते किया और किसी ने हाथ भी मिलाया. लोग बस यही पूछते थे की और कब आये बहार से भइया लोग कैसे है. मैंने जवाब सही ही दिया कि इसी हफ्ते और कुछ दिन रहूँगा बस.

फिर अचनाक सामने मेरे इंग्लिश टीचर दिख गए मुझे.सालों पहले सर के यहाँ इंग्लिश की क्लास की थी लगा नहीं था की वो पहचान पाएंगे मुझे पैर वो देखते ही पहचान गए. उन्होंने तो सीधे ही पूछ लिया की तुम यहाँ कैसे. मैंने भी ास जवाब घुमा दिया और बोला कि बस अभी इसी हफ्ते इंडिया आया हूँ चला जाऊंगा नेक्स्ट वीक. उन्होंने बोला वो तो ठीक है पर तुम यहाँ कैसे आये. मैं उनका प्रश्न समझ तो गया था पर सोच रहा था की ताल मटोल के आंसर दे के बच जाऊं.

बस सर क्या ही करे अब कभी कभी आप न भी चाहें तो आना ही पड़ता है. वो हसने लगे और बोले अच्छा लगा तुमको देख के चलो फिर घर आना मिलने.

मैं बस फटाफट वह से निकल करके घर की और भागा था. घर पंहुचा पर पता चला कि इंग्लिश वाले सर के ही घर की शादी थी वो और वो मुझे पहचान गए थे.

पर सच मैं सालों बाद बिना बुलाए किसी शादी में खाने को जो मजा आया वो किसी भी खाने से बहुत ही अछा था.