जन्मदिन पार्टी

अक्टूबर की शुरुआत थी और मैं बहुत उत्साहित था कि इस बार मेरे जन्मदिन पर एक बड़ी पार्टी होगी। अक्सर मेरा जन्मदिन दिवाली से ठीक पहले होता था और तब किसी न किसी वजह से जन्मदिन पार्टी नहीं हो पाती थी . अपने जन्मदिन से एक-दो हफ्ते पहले मैं अपनी मां के पास गया और कहने लगा, इस बार मेरे जन्मदिन पे पार्टी होनी चाहिए. मम्मी ने मुझे देखा और बोली कि जाकर पापा से पूछो और फिर मैं समझ गया कि इस बार भी कोई पार्टी नहीं होगी।

हमारे पड़ोसी डॉ. कपूर के बेटे मयंक का जन्मदिन तो बहुत शानदार होता था वह मेरे लिए एक सपने जैसे पार्टी थी

घर का मुख्य कमरा रंग-बिरंगे गुब्बारों और रिबन से सजा हुआ हुआ था। ढेर सारे रिबन के साथ दिवार पे लिखा हुआ था मयंक को जन्मदिन की शुभकामनाएं। केक भी बहुत सुंदर था, वह 2 मंजिल ऊंचा था और उस सुन्दर सी मोमबत्ती थी।

सभी बच्चों को कागज की टोपी भी मिली हुए थी केक काटने के लिए रिबन के साथ चाक़ू भी था । गुब्बारे के अंदर चॉक्लेट्स भरी हुई थी। कमरे का एक कोना बड़े-बड़े गिफ्ट बॉक्स से भरा हुआ था, वहा पर एक बी स ा की साइकिल रिबन से सजी हुई थी

पार्टी में म्यूजिक सिस्टम भी बज रहा था और कोल्ड ड्रिंक भी सर्व की जा रही थी. एक कैमरामैन भी था जो केक के साथ मयंक और उसकी फोटो ले रहा था।

आँगन में एक मुख्य बुफ़े लगा हुआ था जहाँ बहुत अच्छा पार्टी खाना परोसा जा रहा था। हर बार उसकी पार्टी के बाद मैं सोचता था कि काश एक बार मेरा भी ऐसा जन्मदिन हो मजा आ जाये।

इस बार मैंने माँ से कहा कि जन्मदिन पे पार्टी होनी चाहिए । पापा उन दिनों कानपुर मैं जॉब किया करते थे और और त्योहारों के चलते मम्मी के पास ज्यादा पैसे नहीं थे ।

मम्मी ने जो पैसे बचाए थे, उससे मेरे बड़े भाई को अमृत की बेकरी की दुकान से एक केक लाने के लिए भेजा। शाम को मेरी मां ने बड़ी बुआ, शशि बुआ और बुआ जी यानी हमारे घर की किरायेदार के परिवार को पार्टी पर बुलाया

सुबह मम्मी ने मुझे कुछ नहीं बताया तो मैंने सोचा कि इस बार भी कोई पार्टी नहीं होगी. मैं सुबह तैयार हो के कोचिंग चला गया और मैं शाम को घर आया तो घर के बाहर में रोशनी महसूस हुई।

मेरी बहन ने ड्राइंग रूम को गुब्बारे से सजाया था । मुझे ऐसा लगा मानो मेरा सपना सच हो गया हो. मम्मी किचन में पूरियां बना रही थी. मम्मी मुझे देख कर के बोली और कहो कि जल्दी से तैयार हो जाओ, अभी सब लोग आने वाले होंगे।

मम्मी ने पापा को नहीं बताया क्योंकि पापा पापा उन दिनों कानपुर मैं जॉब किया करते थे और शायद वो मना भी कर देते और मम्मी शायद मेरे मन की बात जान गयी थी पर कहीं न कहीं मुझे हल्की घबराहट हो रही थी कि पापा को नहीं बताया है कहीं उनको पता चलेगा तो वो गुस्सा न हो जाये । मैं सोच ही रहा था कि मम्मी आईं और बोलीं- जल्दी से तैयार हो जाओ और लिविंग रूम में जाओ, वहां केक लगेगा और डांस पार्टी भी है.

उन दिनों कैमरा होना बड़ी बात थी तब कैमरों में सिर्फ 36 रील की फोटो होती थी । फोटो खिच जाना तो और बड़ी बात थी उन दिनों की बर्थडे पार्टी अभी तक याद है बिना किसी फोटो और वीडियो के ।

पार्टी में सब कुछ सही से चल रहा था और केक काटने के बाद सभी लोग खुश थे तभी रिक्शा घर के गेट पर रुका और देखा कि पापा बैग लेकर उतर रहे हैं।

मुझे पापा को देख के बहुत डर लगा की अब वो क्या बोलेंगे । उनसे क्यों नहीं पुछा पार्टी करने के लिए

पापा आये और कुछ नहीं बोले और चले गये। बुआ ने कहा कि लगता है पापा नाराज़ हैं ।

फिर कुछ देर बाद पापा मेरे पास आये और बोले कि तुमने मेरे बिना केक कैसे काट लिया मेरा इंतजार करना था न ?

मैंने टीका लगने के बाद पापा के पैर छुए और बस वो जन्मदिन यादों के डब्बों मैं मैं बंद हो गया ।