सुबह सुबह स्कूल की प्रार्थना अभी शुरू हुई थी, रोज़ की तरह सारे बच्चे अपनी क्लास की लाइन में लगे थे मैं सब से आगे अपनी क्लास की लाइन मैं लगा हुआ था। प्राचार्य प्रेम कुमार मकरर्ती अपने घर से निकल कर वॉक करते हुए स्कूल की तरफ आ रहे थे हमारा स्कूल एक क्रिश्चियन मिशनरी स्कूल था तो प्रार्थना भी प्रभु इशु मस्से को धन्यवाद देने से होती थी। हमारे प्रिंसिपल मिलिट्री रिटायर्ड कर्नल बहुत ही लम्बे चौड़े एक दम सख्त टाइप के थे। सारे बच्चे उनके नाम से डरते थे और सम्मान भी करते थे। बच्चे लेट आने या अक्सर फ्री पीरियड्स में बहार जाने से डरते थे क्योंकी प्रिंसिपल सर का राउंड कभी भी हो जाता था। प्रिंसिपल मकर्ती के नाम से स्कूल के बड़े बड़े बाबा लोग भी थर्रा जाते थे। 90 के दशक में बाबा बनने का भी एक ट्रेंड था मतलब कि आप के पीछे बहुत सारे लड़के चल रहे हो आप सब के नेता हो टाइप्स। आप वैसे बाबा लोगो को ठेठ गुंडा ही बोल सकते हैं इनका काम भी बड़ा अजीबो गरीब किसी को मारना पीटना, प्रवेश करवा देना या फिर धमाकी दिलाना । मकर्ती सर के आगे गुंडो की बिलकुल ही नहीं चलती थी अक्सर ही गुंडो को थप्पड़ लगाते।

स्कूल मैं कोई फ़र्जी एडमिशन नहीं होने पता नहीं कोई गुंडा उनके सामने कुछ नही कर पाता। स्कूल के काई ठेके जैसे की साइकिल या कंस्ट्रक्ट कॉन्ट्रैक्ट सभी से गुंडो को बहार कर रखा था उनोहने। ऐसा सुनने में आया था कि मकर्ति सर लाइसेंस वाली बंदूक पास रखते थे। वैसे तो उनके दो बुल डॉग ही काफी द जिन्को वो अक्सर साथ लेके चलते थे। गजब की पर्सनैलिटी थे वो और कॉलेज की पोजीशन को काफी सही कर दिया था । मैंने उसी साल कॉलेज में प्रवेश लिया था पर मेरे दो बड़े भैया उस स्कूल में मेरे सीनियर थे।

कुछ दिन पहले ही मकर्ती सर ने स्कूल में कुछ गुंडो को थप्पड़ मार के बहार भागा दिया था सुनाने में आया था कि वो लोग कुछ एडमिशन के चक्कर में उन्हें धमकी देने आए थे। मकरती सर स्कूल की प्रतिष्ठा के लिए कुछ भी कर सकते थे उन दिनों स्कूल में प्रवेश के लिए टेस्ट काफी कठिन था। कुछ लोग कॉन्ट्रैक्ट ले के बच्चों का एडमिशन कारवाना चाहते थे जो कि एडमिशन टेस्ट नहीं निकल पाए थे।

प्रिंसिपल सर का बंगला स्कूल से लगा हुआ था और वो प्रार्थना के टाइम उधर से आते हुए दिख रहे थे। बीच में एक रास्ता था जो कि स्कूल के पीछे को मैदान से कनेक्ट करता था। अक्सर देरी से आने वाले बच्चे वहा के रास्ते से अंदर आ जाते थे। प्रिंसिपल के सामने लेट आने वाले बच्चों की हालत खराब हो जाती थी। उस रास्ते पर कुछ लड़के बाइक में खड़े हुए थे जैसे वो प्रोसिपल सर के वहा से जाने का इंतजार कर रहे थे आज स्कूल के प्रार्थना आर के गोवन सर करा रहे थे और अचानक से एक धमाका हुआ। 3-4 लॉग स्कूटर बाइक से प्रिंसिपल सर के सामने से निकले बहुत धुआँ सा हो गया था. सारे बच्चे भगाने लगे प्रार्थना बीच में छोड़ कर। अफरा तफरी के महौल मैं सब के साथ मैं भी भाग रहा था। मेरे भैया भी साथ में ही हम लोग गौतम सिनेमा तक भागते रहे और फिर वही महेश अंकल के घर चले गए। सब जगह बहुत अफरा तफरी थी फिर थोड़ी देर जब सब कुछ शांत हुआ तो हम अपनी साइकिल लेने स्कूल गए। स्कूल मैं बहुत पुलिस लगी हुई थी तुझे फिर उनोने हमें साइकिल लेने अंदर जाने दिया। पता चला की कुछ गुंडो ने प्रिंसिपल सर पे बम से हमला कर दिया वो काफी घायल थे और उनको मेडिकल कॉलेज ले गए थे। स्कूल मैं काई जगह खून के निसान साफ दिख रहे थे। हम अपनी साइकिल ले के घर चले गए और स्कूल कई महीनो तक बंद रहा। प्रिंसिपल सर की डेथ हो गई थी और कुछ दिनों बाद उनकी एक स्टैचू लगा दी गई थी स्कूल में।

स्कूल अब वैसे डिसिप्लिन नहीं रहा था ना और वो हम सभी मिस करते थे। अब उतना कंट्रोल नहीं था स्कूल में बच्चे बाहर घूमते और बाबा लोगो का भी जोर बहुत हो गया था। मैकार्थी सर सेना में दुश्मनों से नहीं अपने देश में अपने लोगो के द्वारा मार दिए गए थे।

ये बात सच है कि उनके साथ कभी सच से समझौता नहीं किया और स्कूल के लिए और हम सब बच्चों के लिए अपनी जान दे दी। सत सत नमन है ऐसे गुरु को