नए साल की बधाई
नए साल की बधाई
नया साल शुरू होने वाला है कल से और हर साल की तरह पापै कई सारे बुंदलेस कैलेंडर्स के और डायरी के ले के आये है. पापा हर साल सब लोगो को लाइफ इन्शुरन्स कारपोरेशन के कैलेंडर्स डायरी दिया करते थे.ये सारे कैलेंडर्स वो खरीद कर बाँट दिया करते थे
अक्सर हम लोगो को पास पड़ोस महल्लों और रिश्तेदारों को कैलेंडर्स देना होता था. ये पूरा वितरण कार्यक्रम जनुअरी तक तो चलता ही था.हमे लोगो को भी वैसे बहुत ही मजा आता था. ये बात उन दिनों की है नव वर्ष की बधाई ग्रीटिंग कार्ड से दी जाती थी. आप पोस्ट मैन का इंतजार करते थे और न जाने कितनी शिकायत की कजिन का कार्ड नहीं आया शायद भूल गए या कार्ड में हमारा नाम क्यों नहीं.ग्रीटिंग कार्ड्स की दुकानें दिसंबर सी ही शुरू हो हो जाती थी क्योंकि अगर दूर कहीं कार्ड भेजना है तो टाइम लगता था. पापा लाइफ इन्शुरन्स कारपोरेशन में थे और उनका सोशल सर्किल बहुत बड़ा सा था . मुझे अक्सर ऐसा लगता कि पापा को ऐसे सभी को कैलेंडर नहीं देना चाहिए.लोग ये सोचते है की ये तो इन्हे देना ही है और ये इनका काम है
पापा ने मुझे कैलेंडर दिए की महौल्ले मैं बाँट देना. मुझे पीछे रहने वाले डॉक्टर अंकल के यहाँ कैलेंडर देने पर न जाने क्यों मुझे लगा कि इनको क्यों कैलेंडर दूँ. डॉक्टर अंकल तो अच्छे थे पर मुझे लगता कि ये रिश्ता थोड़ा ववसाइएक है. पता नहीं क्या सोच के मैंने वो नहीं दिया और अपने किसी दोस्त को दे दिया.
कुछ दिनों बाद ही मेरी तबियत खराब थी और मैं पापा के साथ उनकी क्लिनिक पे गया. अचानक उनकी दीवाल पे लगे कैलेंडर पे ध्यान दिया तो वो पिछले साल का लाइफ इन्शुरन्स कारपोरेशन का कैलेंडर था. मेरी तो उसे देख के सिट्टी पिट्टी गुम हो गयी. फिर डॉक्टर अंकल ने चेकउप के बाद दवाई पेपर पे लिख दी. मुझसे बोले कि तुमको वायरल है धयान रखने की और भाइयों को न हो जाये.वो हम सबको बहुत अच्छे से जानते थे.उनकी बातों मैं बहुत आत्मीयता थी फिर वो पूछते रहे पढ़ाई कैसे चल रही है . वो पापा को एक बड़े भाई की तरह समझते रहे सेहत पे ध्यान दिया करो . थोड़ी देर बाद पापा ने बोला कि अरे आपने पुराने साल का कैलेंडर क्यों लगाया है. डॉक्टर अंकल हँसते हुए बोले अरे भाई इस बार आपने भेजा नहीं तो बस पुराना ही लगा हुआ है. पापा ने मेरी तरफ देखा फिर उनसे बोले अरे माफ़ करिएगा मैं शायद भूल गया था. फिर उन्होंने अपने बैग से नया कैलेंडर निकाल के उनकी और बड़ा दिया. पापा के बैग में कैलेंडर्स और डायरीज काफी दिनों तक रहती थी.
हम क्लिनिक से बाहर निकले तो मैं पापा के बिना पूछे ही बोल दिया कि मैंने वो कैलेंडर अपने दोस्त को दे दिया था. पापा मेरी और देखते रहे और मुस्करा कर सुनते रहे फिर उन्होंने बोले की तुम मुझसे और मांग सकते थे पर यहाँ तो देना चाहिए था. पापा ने बोला कैलेंडर या ग्रीटिंग कार्ड हम इस लिए तो नहीं देते कि आपको किसी ने भेजा या नहीं ये तो आप देते है की ताकि पूरे साल कोई आपको याद रखे जब भी वो अपनी दीवाल पे तारीख देखे.
सच में वो भी क्या दिन थे जान सिर्फ व्हाट्स अप्प मेसेजेस से नहीं हम दिलों से जुड़े होते थे……नए साल की बधाई….