शिक्षा के लिए संघर्ष
बचपन में ये कहानी स्कूल बुक्स में थी. कहानी का नायक अमेरिका में स्ट्रगल करते हुए अपनी पढ़ाई करने vergnia जाता है सब कुछ छोड़ के vergnia उसकी माँ बीमार है पर वो जाता है ये जानते हुए कि शायद अब वो उनको नहीं देख पाएगा
उन दिनों ये कहानी अजीब सी लगती थी समझ नहीं पता था की ये कैसे स्ट्रगल था. एजुकेशन के लिए स्ट्रगल करते हुए मैंने अपनी मम्मी को देखा था और सही मायने में वो मुझे उस राइटर से भी बड़ा लगता था. मेरी मम्मी इल्लाहाबाद के पास एक गाँव चंदोहा से थी नाना जी रेलवे में काम करते थे .मेरे ग्रैंड फादर भी रेलवे में थे और नाना को जानते थे मम्मी की शादी जल्दी हो गयी थी फिर उनोहने इल्लाहाबाद आने के बाद अपनी पढ़ाई शुरू की.
उनके लिए उस समय शायद इतना आसान नहीं था जितना अभी लगता है . वो बताती थी कि पहली बार वो फ़ैल हुई थी और कैसे लोगो ने उनसे बोला की ये तुम्हारे बस का नहीं . बाबा ने उन्हें पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया .उनोहने 10 और 12 किया फिर ग्रेजुएशन कानपुर यूनिवर्सिटी से . उनकी राह आसान नहीं थी हम 4 भाई और 1 बहन थे परिवार के साथ रह के सारे काम करके पढ़ना शायद उस राइटर के स्ट्रगल से बहुत बड़ा होगा बहुत कम ही लोग प्रोत्साहित कर पाते क्योंकि सबको ही लगता कि क्या कर लोगे ऐसे पढ़ाई करके भी
बचपन मैं उनको सारे काम के बाद कभी रात में पढ़ाई करते देखना फिर सुबह एग्जाम जाते देखना अजीब सा लगता था
. मुझे याद है जब वो ग्रेजुएशन का एग्जाम देने भरी धूप में मुझे सेवासदन स्कूल ले गयी थी. मैं तब बहुत छोटा ही था पर हमेशा लगता की क्या ही फायदा होगा ये सब करके उनके संगर्ष का मतलब नहीं पता था. मम्मी ने लाइफ इन्शुरन्स एजेंसी का एग्जाम दिया और क्लियर किया बहुत खुशी से बताया करती थी की वो एक बार मैं पास हो गयी थी फिर पोस्ट. उन्होंने पोस्टऑफिस में एजेंट का काम शुरू किया था जिसे मेरे बाबा (ग्रैंड फादर) करते थे फिर उनके जाने के बाद उनोहने संभाल लिया
. बहुत ज्यादा इनकम तो नहीं थी पर उनको पसंद था उनका ये काम. लोगो को बचत की सलाह देना. जब हम सब जॉब करने लगे तो मैंने कई बार बोला मम्मी अब इस काम को बंद कर दो पर वो उसको पसंद करती थी . शायद उनके अंदर एक आत्मगौरव था जैसे कि उनका खुद की एक दुनिया है जहां लोग ुको जानते है सलाह लेते है
उन्हें पढ़ाई का महत्व पता था और वो उनोहने हम सब को सिखाया अपने उदाहरण से .कौन किस क्लास में है क्या कोचिंग कर रहा है किस सब्जेक्ट में क्या पढ़ना है सब पता था उनको. अक्सर लोगो को सलाह भी दे देती थी की कैसे पढ़ाई करो
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मुझे आज भी याद है एग्जाम हमारे होते रात की नींद उनकी गायब , रिजल्ट आने से पहले सारे मंदिरों मैं मानता मांग लेना.
हर एक एग्जाम के बाद रिजल्ट के लिए उनका बेचैन रहना. नौकरी के इंटरव्यूज देता तो सबसे पहले उनका ही फोन आता हर इंटरव्यू के बाद कैसे हुआ क्या पुछा.
आज भी याद है मम्मी इंडिया से आयरलैंड जा रही थी अकेले पर उनके अंदर आत्मविश्वास था और उसको देख के लगा की सच मैं एजुकेशन जरूरी है
. एजुकेशन के लिए इतना स्ट्रगल जो मुझे बचपन मैं समझ नहीं आता था वो बड़े होने के बाद उनके अंदर के आत्मविश्वास को देख के समझ आया.
मई 2021 में कोविड आपदा के दौरान, हमने मम्मी को खो दिया.पर उनके द्वारा दी गयी शिक्षा और एजुकेशन की क्या वैल्यू है हमारे अन्दर है हमेशा रहेगी