भीड़
यह सुनते ही उसकी आँखें भर आईं, आवाज़ में एक गहरी बेबसी थी “भैया, ट्रेन में सीट दिलाने का कितना लोगे?” उसने स्टेशन पर खड़े कुली …
यह सुनते ही उसकी आँखें भर आईं, आवाज़ में एक गहरी बेबसी थी “भैया, ट्रेन में सीट दिलाने का कितना लोगे?” उसने स्टेशन पर खड़े कुली …
दरवाजे पर ज़ोर से दस्तक हुई। मैं थोड़ा चौंका, इस वक्त कौन आ गया? दरवाजा खोला तो सामने एक दुबला-पतला भारतीय लड़का खड़ा था। उम्र कोई 20-25 साल …
मैं अपना बैग बंद करने में व्यस्त था, तभी पीछे से आवाज सुनाई दी। पलटकर देखा तो पापा कमरे में आ रहे थे। उनकी नजर मुझ पर पड़ी और उन्होंने पूछा, …
“कैसा लग रहा है, बेटा, इतने सालों बाद अपने देश वापस आकर?” शुक्ला अंकल ने घर में प्रवेश करते ही पूछा। शुक्ला अंकल पापा के पुराने …
माँ बार-बार बच्चे का माथा छूकर देखतीं और हर बार उनकी चिंता बढ़ जाती। बुखार था कि उतरने का नाम नहीं ले रहा था, और अब यह दूसरे दिन में पहुंच …
आज सुबह दादाजी दादी से धीरे-धीरे कह रहे थे कि इस बार कल्पवास के लिए बच्चों को साथ नहीं ले जाएंगे। मैंने उनकी बातें चुपके से सुन लीं, और मुझे …
आज पुराने दस्तावेज़ों के बीच तलाश करते हुए एक पुरानी कॉपी हाथ लगी। उसे देखते ही बचपन की अनगिनत यादें ताज़ा हो गईं। मेरे बेटे ने जब इसे देखा …
“कैसे हो अमित भाई?” सालों बाद अपने पुराने दोस्त अमित की दुकान के सामने खड़ा था। अमित अपने काम में इतना मग्न था कि उसने मुझे देखा …
ट्रेन का आरक्षण कन्फर्म था,परंतू मैं तो अपनी आदत के अनुसार दरवाजे पर लगी लिस्ट में अपना नाम चेक किया। एसी सेकंड क्लास में आमतौर पर भीड़ कम …
यह कहानी 2006 की है, जब मैं एक सॉफ्टवेयर कंसल्टेंसी में काम करता था। मेरे शुरुआती दिनों में मुझे एक ट्रेनिंग के लिए भेजा गया, जो कंपनी के …
मेरे अंदर एक समय से ही एक तरह की साम्यवादी विचारधारा थी, जो घर में काम करने वाले नौकरों और भारतीय समाज में उनके साथ होने वाले व्यवहार को …
मेरी आंख नीचे की ट्रेन की बर्थ पे हो रहे शोर से खुल गई। ट्रेन अभी भी रुकी हुई थी और नीचे बैठे हुए लोग ना जाने किस बात पर बहस करते जा रहे थे. …